Thursday, January 17, 2008

ये जीत नहीं आसां मेरी जान

लगता है कि ईशांत-आरपी-इरफान ने जरूर अजीत अगरकर के 2003-04 के एडिलेड में किए गए यादगार प्रदर्शन का वीडियो टेप देखा होगा। अब हो सकता है कि अगली बार जब भारत ऑस्ट्रेलिया के दौरे में आए तो भारतीय गेंदबाज इस तिकड़ी की वीडियो टेप देखे।

पर मेरी जान मंजिल अभी दूर है। बेशक हॉग को न खिलाकर ऑस्ट्रेलिया ने एक गेंदबाज घटाया तो हैडन के बैठने से एक बल्लेबाज घट गया। कंगारुओं को वापसी का मौका देना जानलेवा साबित हो सकता है। साइमंड्स ने तो आज डरा ही दिया था। शुक्र है कि हमारे आक्रमण में विविधता थी। न हीं तो आधुनिक क्रिकेट का यह महाबली भीम तो आज ही भारत को मैच से बाहर करने पर आमदा था।
भारत को कम से कम इन शक्तिशाली कंगारुओं को 450-500 रन का लक्ष्य देना होगा। न हीं तो ये अभी भी पलटवार कर सकते हैं।

आज के मैच का अगर कोई हीरो रहा तो वह है ईशांत शर्मा। पोंटिंग और क्लार्क के अहम विकेट इसी ने टपकाए। हां आरपी भी कम नहीं रहे। हस्सी को जिंदगी का पहला डक इसी ने दिया। इरफान को भी न भूलो उसी ने तीन गेंदों में 2 विकेट टपकाकर मोमेंटम बनाया।

कुल मिलाकर भारत इतिहास रचने के आसार बना रहा है। लेकिन यह तभी संभव है जब सचिन समेत कोई भी लड्डू कैच न टपकाए। रऊफ-बॉडन की जालिम उंगलियां सचिन समेत किसी के खिलाफ बेवजह हवा में न लहराई जाएं।

सबकुछ निर्भर करेगा शुक्रवार के पहले घंटे पर। अगर लंबे समय में वापसी कर रहे सहवाग अगर यहां शतक ठोक देते हैं तो यह उनके कैरियर की सबसे अहम पारी होगी। भगवान से प्रार्थना है कि शुक्रवार को भारत के लिए सबकुछ शुक्र-शुक्र ही हो।

1 comment:

News said...

Dear sir
very good artical