Saturday, January 19, 2008

भरोसा नहीं होता हम जीत गए..

आखिर फिर एक ऐसा दिन आ ही गया, जिसके मैंने अपने जीवन में घटने की उम्मीद भी नहीं की थी। भारत ने ऑस्ट्रेलिया का विजयी रथ उसके ही अभेद्य दुर्ग पर्थ में रोक ही दिया। अति सामान्य करार दिए गए भारतीय तेज गेंदबाजांे की तिकड़ी ने महाबली विश्व चैंपियन के धुरंधर गेंदबाजों से बेहतर प्रदर्शन किया।



विश्व क्रिकेट में बबुआ गंेदबाज ईशांत शर्मा ने कुछ ही समय पहले तक हर मैच की हर पारी में शतक ठोंकने का संकल्प से ले चुके रिकी पोंटिंग की नाक में दम कर दिया। सभी गेंदबाजों ने दोनों पारी में इस तरह गेंदबाजी की मानों अपने-अपने शिकार छांट रखे हों। पोंटिंग,जैकस, हस्सी, साइमंड्स और रॉजर्स दोनों पारियों में एक ही गेंदबाज का शिकार बने। हां सहवाग ने दूसरी पारी में आरपी के कुछ शिकारों को बांट लिया। अगर मैच विजेता गेंदबाज पैदा करना कोई पैमाना है तो भारत ने पिछले चार सालों में सबसे अधिक मैच विजेता गंेदबाज पैदा किए।



2003-04 में अगरकर ने एडिलेड में टेस्ट जिताया तो इसके बाद पाकिस्तान में इरफान-बालाजी भारत की पाकिस्तान की भूमि में पहली जीत के शिल्पकार बने। फिर श्रीसंथ ने दक्षिण अफ्रीका में एक टेस्ट मैच अपने ही दम पर जिताया तो आरपी-जहीर ने इंग्लैंड में भारत को टेस्ट सिरीज में विजय दिलाई। इस बार यह काम ईशांत-इरफान-आरपी की तिकड़ी ने कर दिखाया। हां इन सभी अवसरों में एक गेंदबाज लगातार शामिल रहा। वह है जेंबो ठीक समझे भारतीय टीम के कप्तान अनिल कुंबले।



अगर विदेशों में मैच जीतना कोई कसौटी है। तो ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत की ही एक ऐसी टीम रही जिसने पिछले चार-पांच सालों में वेस्टइंडीज-इर्ंग्लैंड-बांग्लादेश और पाकिस्तान 2003-04 को उनके ही घर पर हराया तो दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसी जगहों में एक-एक टेस्ट मैच जीता।



बधाई... हिंदुस्तान बधाई...।

Thursday, January 17, 2008

ये जीत नहीं आसां मेरी जान

लगता है कि ईशांत-आरपी-इरफान ने जरूर अजीत अगरकर के 2003-04 के एडिलेड में किए गए यादगार प्रदर्शन का वीडियो टेप देखा होगा। अब हो सकता है कि अगली बार जब भारत ऑस्ट्रेलिया के दौरे में आए तो भारतीय गेंदबाज इस तिकड़ी की वीडियो टेप देखे।

पर मेरी जान मंजिल अभी दूर है। बेशक हॉग को न खिलाकर ऑस्ट्रेलिया ने एक गेंदबाज घटाया तो हैडन के बैठने से एक बल्लेबाज घट गया। कंगारुओं को वापसी का मौका देना जानलेवा साबित हो सकता है। साइमंड्स ने तो आज डरा ही दिया था। शुक्र है कि हमारे आक्रमण में विविधता थी। न हीं तो आधुनिक क्रिकेट का यह महाबली भीम तो आज ही भारत को मैच से बाहर करने पर आमदा था।
भारत को कम से कम इन शक्तिशाली कंगारुओं को 450-500 रन का लक्ष्य देना होगा। न हीं तो ये अभी भी पलटवार कर सकते हैं।

आज के मैच का अगर कोई हीरो रहा तो वह है ईशांत शर्मा। पोंटिंग और क्लार्क के अहम विकेट इसी ने टपकाए। हां आरपी भी कम नहीं रहे। हस्सी को जिंदगी का पहला डक इसी ने दिया। इरफान को भी न भूलो उसी ने तीन गेंदों में 2 विकेट टपकाकर मोमेंटम बनाया।

कुल मिलाकर भारत इतिहास रचने के आसार बना रहा है। लेकिन यह तभी संभव है जब सचिन समेत कोई भी लड्डू कैच न टपकाए। रऊफ-बॉडन की जालिम उंगलियां सचिन समेत किसी के खिलाफ बेवजह हवा में न लहराई जाएं।

सबकुछ निर्भर करेगा शुक्रवार के पहले घंटे पर। अगर लंबे समय में वापसी कर रहे सहवाग अगर यहां शतक ठोक देते हैं तो यह उनके कैरियर की सबसे अहम पारी होगी। भगवान से प्रार्थना है कि शुक्रवार को भारत के लिए सबकुछ शुक्र-शुक्र ही हो।

Wednesday, January 16, 2008

अब क्या होगा


भारत का पर्थ में प्रदर्शन आलोचकों की उम्मीद के विपरीत अच्छा ही रहा। अगर गांगुली और लक्ष्मण ने विकेट न थ्रो किए होते तो शायद ऑस्ट्रेलिया की चंडाल चौकड़ी को नानी याद आ जाती।




सचिन की बल् लेबाजी ओह सचमुच लाजवाब रही। ब्रेट ली ने तो बाउंसर सचिन को चमड़े की गंध सुंघाने के लिए फेका। लेकिन मास्टर ब्लॉस्टर ने उसे बल्ले से यूं नायाब अंदाज में मारा की गिली समेत सारे स्लिप के फिल्डर हाथ मलते ही रह गए। 71 रन की यह पारी सचमुच बेजोड़ थी। हालात के अनुसार तो सिडनी और मेलबोर्न से भी बेहतर।




कहां है इयान चैपल जो कल तक उन्हें संन्यास लेने की सीख दे रहे थे। आज सचिन उन्हीं के मैदानों में पूरी लय में है। काश सचिन को रऊफ ने बख्श दिया होता। लेकिन रऊफ और बोडेन ने सचमुच शानदार अंपायरिंग की। द्रविड़ को एक संदेह का लाभ भी मिला। लेकिन यह खिलाड़ी फिर शतकों की सिल्वर जुबली से चूक ही गया।




अंतिम समय में अगर लक्ष्मण-द्रविड़ जमे रहते तो खुदा न जाने ऑस्ट्रेलियाईयों का क्या हाल होता कल। कोलकाता 2001 भूले नहीं हैं कंगारु। भारत के खिलाफ हमेशा खतरा महसूस करने वाले ये विश्व चैंपियन सिडनी में कैसे जीते दुनिया से छुपा नहीं। फिर इनका विजयी रथ रोकने लक्ष्मण से कम से कम शतक की दरकार तो थी ही।




कल अगर 100 रन भी और बन गए तो भारत अच्छी स्थित में होगा। हालांकि यह अब मुश्किल ही लगता है। अब सारा दारोमदार गेंदबाजों पर है।




ईशांत-इरफान-आरपी अजीत अगरकर के एडिलेड में 2003-04 के प्रदर्शन की वीडियो टेप देखो भाई और कर दिखाओ कुछ खास। अगर आगरकर कर सकता है तो तुम क्यों नहीं।

Monday, January 14, 2008

Why India let go aussi

After India drop charge against Bad Brad Hogg Aussi again emerge clear cut winner becouse Clark and rest of team still saying that they did nothing wrong in Sydney. Auss got what they want Harbhajan still facing charge for offence that he did not commit.
I am not not thinking that Aussi will change at any level in ground. They won Sydeny test and kept Gavskar-Bordar traphy with them before deadly Prth pitch. Now doubt Ponting man will break Steve waugh record of winning consicutive 16 test, they equal that record at sydney.
So according to me charging Hogg India mount some pressure on Aussi and after droping that charge now leting them go.